जाते जाते दर्द भरी ख़ुशी…?

एस एम फ़रीद भारतीय

कौन कह सकता है आज सुरों के सरताज़ को हमारे बीच से गये 41 साल पूरे हो गये, ऐसा लगता है जैसे कल ही की बात है, नई पीढ़ी मैं भी रफ़ी साहब उतने ही मशहूर हैं जितने अपने ज़माने के लोगों मैं हुआ करते थे, रफ़ी साहब के जाने के बाद शायरी का ख़ात्मा ही हो गया, कुछ गानों को छोड़ बाकी सब एक मज़ाक और हुड़दंग के सिवा कुछ नहीं, कलाम क्या होता है ये आज भी पुराने कलाम से ही सीखने और सुनने को मिलता है.

आज 31 जुलाई मरहूम मौहम्मद रफ़ी की आवाज के बिना हिंदी सिने संगीत की कल्पना नहीं की जा सकती, उनके शास्त्रीय संगीत पर आधारित गीतों की भी अद्भुत दुनियां है, अल्लाह मरहूम रफ़ी साहब की मग़्फ़िरत फ़रमाये आमीन.

दुनियां मैं सुरों के सरताज मौहम्मद रफ़ी साहब का 31 जुलाई 1980 को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था, आज उनकी 41 वीं पुण्‍यतिथि है, पद्म श्री के साथ, एक राष्ट्रीय पुरस्कार और छह फिल्मफेयर पुरस्कारों से सम्मानित मोहम्मद रफी साहब को शास्त्रीय संगीत, देशभक्ति गाने, मधुर दर्दभरे गीतों, रोमांटिक गाने, ग़ज़लें और यहां तक कि भजनों के लिए जाना जाता है.

उन्होंने अपने फैंस के लिए दिलों को छू जाने वाले कई सदाबहार गाने गाए हैं, इनमें ‘बहारों फूल बरसाओं’ से लेकर ‘तुम्हारी नज़र क्यों खफा हो गई’, ‘आज मौसम’ जैसे गाने शामिल हैं, आज यानी शनिवार को उनकी 41 वीं पुण्यतिथि के मौके पर हम एनबीटीवी इंडिया आपके लिए मोहम्मद रफ़ी के कुछ ऐसे गाने लेकर आया है, जो ना सिर्फ आपके हर मूड के लिए परफेक्ट है बल्कि इन्हें गुनगुनाए ब‍िना संगीत भी अधूरा सा है.

‘बहारों फूल बरसाओं’, ‘चांद सी महबूबा’, ‘ये रेश्मी जुल्फें ये शरबती आंखें’, ‘मेरे दुश्मन तू मेरी दोस्ती को तरसे’, ‘ओ फिकरीवाली तू कल फिर आना’, ‘गोरे रंग पे ना’, ‘आज मौसम बड़ा बइमान है’, ‘मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा’, ‘पत्थर के सनम तुझे हमने’, ‘लिखे जो खत तुझे वो तेरी याद में’, ‘तेरी बिंदिया रे’, ‘झिलमिल सितारों का आंगन होगा’, (बागों में बाहर है, ‘क्या हुआ तेरा वादा’, ‘वो जब याद आए बहुत याद आए’, ‘ये दिल तुम बिन कही लगता नहीं’, ‘तेरी गलियों में ना रखेंगे कदम’, यह दुनिया यह महफ़िल के बोल, ‘खुश रहे तू सदा’, ‘बदन पे सितारें लपटे हुए’, ‘कितना प्यार वादा है’, ‘चांद मेरा दिल’,’अब क्या मिसाल दूं’, ‘चौदहवीं का चाँद’, ‘जो बात तुम में है’, ‘हुई शाम उनका ख्याल आ गया’, ‘हाल देख जो बकारारों का’, ‘कैसे कटेगी जिंदगी’ वगैरह.

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