ऐसे लोगों के साथ हीं मानवता जीवित है।

विलासपुर के कलेक्टर डॉ संजय अलंग जब केंद्रीय जेल में निरीक्षण के लिए पहुँचे तो देखा कि एक 6 साल की बच्ची अपने पिता से लिपट कर रो रही थी। पूछने पर पता चला कि एक अपराध में सजायाफता क़ैदी है, ये उसकी बेटी है। 5 साल की सजा काट ली है, 5 साल और …

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इन भावनाओं के सामने पैसा पावर कुछ भी नहीं

ये खेल से उत्पन्न वो भावनाएं जिसको न कोई खरीद सकता और न ही कोई बड़े सा बड़ा एक्टर एक्ट कर सकता ये रियल जज्बात हैंऔर यही जज्बात स्पोर्ट्स को नई ऊंचाइयां देते हैंयह दृश्य टोक्यो ओलंपिक में पुरुषों की ऊंची कूद के फाइनल का है। फाइनल में इटली के जियानमारको ताम्बरी का सामना कतर …

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“Loss To Women’s Movement”: Feminist Icon Kamla Bhasin Dies At 75

A poet and an author, who identified herself as a “social scientist by training”, Kamla Bhasin wrote multiple books – a large number of them on feminism and women’s issues – since she started working on developmental issues in the 1970s. New Delhi:  Women’s rights activist Kamla Bhasin, known for being a part of ‘One …

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Muharram 2021: History, significance of the day of Ashura, how Sunni and Shia observe the day

This year Muharram began on August 11 in India, it is also based upon the sighting of the moon, just like Ramadan. Muharram also called as Muharram-ul-Haram, is the most auspicious occasion in Islam after Ramadan and is the first month of the Islamic Hijri calendar. Muharram began on August 11 in India, it is …

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भारत रत्न खान अब्दुल गफ्फार खां

भारत रत्न खान अब्दुल गफ्फार खां जी ने 24 नवम्बर 1969 को संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को सम्बोधित करते हुए कहा था “कि आपको मालूम होगा कि 23 साल बाद मैं भारत में आया हूं, इस दौरान मेरा अक्सर वक्त जेलों में बीता है। मुद्दत से मेरी आरजू थी कि हिन्दुस्तान जाऊं …

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जाते जाते दर्द भरी ख़ुशी…?

एस एम फ़रीद भारतीय कौन कह सकता है आज सुरों के सरताज़ को हमारे बीच से गये 41 साल पूरे हो गये, ऐसा लगता है जैसे कल ही की बात है, नई पीढ़ी मैं भी रफ़ी साहब उतने ही मशहूर हैं जितने अपने ज़माने के लोगों मैं हुआ करते थे, रफ़ी साहब के जाने के …

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Abdul Ghaffar Khan

Abdul Ghaffār Khān (Pashto: عبدالغفار خان‎; 6 February 1890 – 20 January 1988), also known as Bādshāh Khān (بادشاه خان‎, ‘King Khan’), Frontier/Simant Gandhi or Bāchā Khān (باچا خان‎, ‘King of Chiefs‘) and honourably addressed as Fakhr-e-Afghan (فخرِ افغان‎, ‘Pride of Afghans‘), was a Pashtun[2] independence activist against British colonial rule in India. He was a political and spiritual leader known for his nonviolent opposition and lifelong pacifism; he was a devout Muslim and an advocate for Hindu−Muslim …

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